तू उनका है ये उनको जता

तू उनका है ये उनको जता तो सही,
भुल कर अपना हम रुठो को मना तो सही,
जो बदल गया था बदल जायेगा बदलते वक्त की तरह,
तू बदल खुद को पहले जैसा बना तो सही,

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आवाज ए दिल ……..

ना गुनाह किया हैं ना जीने की सजा माँगता हूँ
आज तुझसे मेरे होने की वजह माँगता हूँ 
कल मिलाया था तो आज बिछड़ने का इशारा ना दे 
ऐ खुदा मैने कब कहा की उसके सिवा सारा जहां मांगता हूँ .

मुझको याद कर लेना

कभी भी  हो अगर तन्हा तो मुझको याद कर लेना
किसी भी बात पर हंसना, तो मुझको याद कर लेना

इंसान बदलते हैं कि मौसम भी बदलता है
बारिश में ना छतरी हो, तो मुझको याद कर लेना

बड़े संघर्ष होते हैं जीवन के सफर में 
कहीं भी तुम सिहर जाओ, तो मुझको याद कर लेना

मैं बस तन्हा ही रहता हूं कि महफिल में नहीं जाता
कभी महफिल में तन्हा हो, तो मुझको याद कर लेना

लफ्ज़ कागज और कलम ये बस बस बहाने हैं
यह जो भी लिखा मैंने वह बस एहसास मेरे हैं 

कभी भी तुम्हें पढ़ना, तो मुझको याद कर लेना

———-नशा——-


Kai saal hue kuchh hua tha aisa, jise kabhi bhula na paunga,
Raaz tha jo ab dunia me lo, aaj tumhe batalaunga,,

Madhosh the sab bus mujhe chhodkar, ho gaye the sab centy,
Chhai thi kuchh aise sab par wo angoor ki beti,
Wo bhi bhatak gaye the ab tak, kahte the jo ise kharab,
Khush tha man hi man ye sochkar, na pee thi maine jo sharab,
Shaayad meri khushi khuda ko thodi bhi na bhai,
Mukh par kapada bandh ke wo fir is mahfil me aayi,
Khuda bhi tha madhosh,use bhi shajish ka nasha tha chhaya,
Aankh me uski laake kahi se,katara ek chubhaya,
Aisa laga ki mano hoga ab to koi khatara,
Ainak ka naqaab ankh se jaise uske utara,
Nain the uske ya thi koi, sheesi bhari hijab ki,
Aaj laga hai ho na ho wo purani wali sharaab thee,
Chand hi ghanto me sabko, maine hosh me paya,
Us din mujhako aisi chadhi, haaay ab tak hosh na aaya,

Nashe me hu par nhi hu jhootha, itna bhi to jaan lo,
Huun muft me deta thodi nasihat, aaj ise tum maan lo,
Gar maut nhi pyari tumko,gar tumhe abhi ho jeena,
Aye dost “रवि”” itana sun lo, aankho se kabhi na peena,
Warna kahoge tum bhi ab, uske bin na jee paunga,


Raaz tha ab jo………………

चलो कुछ गलतियाँ सुधार लें

चलो कुछ गलतियाँ सुधार लें,
इस मोहब्बत से थोड़ा समय उधार लें ,

कब से मशरुफ हैं एक दुसरे को चाहने मे,
बरसों गुजार दिये एक ल्फज् (love) का मान  बचाने मे ,

चलो अब इस वादे को तोड़ दो,
ना करो फिक्र मुझे तड़पता छोड़ दो,

सुना है बिछड़ने से रिस्ता मजबूत होता है,
कद्र उसी की होती है जो खुद से दूर होता है.

आज हम भी वही करें और रूठ जायें,
कि कुछ पल के लिये तेरा मुझसे नाता टूट जाये,

शायद इस ल्फज् में कुछ वजन आ जाये,
कि रिश्तों में कुछ अपनापन आ जाये,

शायद हो जाये ये अधूरापन कम,
शायद “रवि” ही हो  फिर तुम्हारा हमदम,

तो चलो कुछ पल के लिए चाहत को मार लें,
इस मोहब्बत से थोड़ा समय उधार लें ,