अमीरों की बस्ती मे एक ज़लता

अमीरों की बस्ती मे एक ज़लता हुआ घर नजर आया है ,
आज फिर वो कयामत का मंजर नजर आया है ,
रोक सको तो रोक लो खुद को ढूबने से ऐ रेगिस्तान ,
की आज फिर “रवि” की आँखो मे समन्दर नजर आया है।

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आँखों मे सैलाब नजर आया है,

अनजान थी दुनिया जिस से अब तक,

आज वही राज सरेआम बिखर आया है, 

वो जो कभी जीने का मकसद था हमारा,

छोटे-छोटे टुकड़ो मे वो टूटा ख्वाब नजर आया है, 

कुछ यूँ घेरा है यादोँ के भँवर ने इसे, 

कि फिर “रवि ” की आँखों मे सैलाब नजर आया है,

आवाज ए दिल ……..

ना गुनाह किया हैं ना जीने की सजा माँगता हूँ
आज तुझसे मेरे होने की वजह माँगता हूँ 
कल मिलाया था तो आज बिछड़ने का इशारा ना दे 
ऐ खुदा मैने कब कहा की उसके सिवा सारा जहां मांगता हूँ .

कुछ इस तरह मरहम मिला है

कुछ इस तरह मरहम  मिला है “रवि”को तनहाई का,
कि अब तो मजा भी आ रहा है जुदाई का ,
यू सुकून मिला है तेरे ज़ख्म  बेनकाब देख कर ,
कि सिर्फ मुझे ही नहीं है दर्द बेवफाई का……