नाकाम कोशिश है मुझे 

नाकाम कोशिश है मुझे आजमाने की,
कि समंदर आज भी सोचता है मुझे डुबाने की,
हम पंख नहीं हौसलों से उड़ते हैं,
हवाएं लाख साजिश कर लें “रवि” को गिराने की,
तू अपना है जो मुझे दर्द देता है वरना,
क्या जरूरत है मुझे ग़म मे भी मुस्कराने की,…..

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अमीरों की बस्ती मे एक ज़लता

अमीरों की बस्ती मे एक ज़लता हुआ घर नजर आया है ,
आज फिर वो कयामत का मंजर नजर आया है ,
रोक सको तो रोक लो खुद को ढूबने से ऐ रेगिस्तान ,
की आज फिर “रवि” की आँखो मे समन्दर नजर आया है।

तेरी आंखे

गहरी तन्हा झील सी नजर आती है तेरी आंखे ,
तू लाख छुपाये पर सारा राज बताती है तेरी आंखे,
है छेड़ती जब हवा तेरी जुल्फो को अपना समझ कर ,
छुप जाती है घट!ओ (जुल्फ) मे शर्माकर तेरी आंखे ,
आ जाती है तेरे चेहरे पर भी वो नूर की रौनक ,
आइने मे जो तुझे प्यार से  देखे तेरी  आंखे,
बेखौफ़ रहता है तेरी पलको से लिपट के ये काजल ,
जैसे हर बुरी नजर से उसे बचाती है तेरी आंखे,

तू उनका है ये उनको जता

तू उनका है ये उनको जता तो सही,
भुल कर अपना हम रुठो को मना तो सही,
जो बदल गया था बदल जायेगा बदलते वक्त की तरह,
तू बदल खुद को पहले जैसा बना तो सही,

आँखों मे सैलाब नजर आया है,

अनजान थी दुनिया जिस से अब तक,

आज वही राज सरेआम बिखर आया है, 

वो जो कभी जीने का मकसद था हमारा,

छोटे-छोटे टुकड़ो मे वो टूटा ख्वाब नजर आया है, 

कुछ यूँ घेरा है यादोँ के भँवर ने इसे, 

कि फिर “रवि ” की आँखों मे सैलाब नजर आया है,

सौ बार नमन है कम बेशक

है जिनकी देन से आज सवेरा, जो देके लबों पर गीत गये,
सौ बार नमन है कम बेशक, उनको जो आखिर जीत गये!

सीने पर गोली खाकर भी , जो बस  आगे ही बढ़ते रहे,
सांस ना छूट गई जब तक, वो  फिरंगियों से लड़ते रहे,
खूं मे लथपथ थे पर उनको, थोडी थकन ना आती थी,
पांव के छाले उनके लहु मे, जीत की अगन लगाती थी,
बंदूक की ठोकर सह-सह कर, कंधे जब जख्मी हो जाते,
बांध खपाच को कंधे पर, वो शूरवीर फिर डट जाते,
भेंट मे आजदी देकर जो , वो मांटी के पूत गये ,
सौ बार नमन है कम बेशक, उनको जो आखिर जीत गये!

जिस मां की  आंख के तारे थे, उन आंख मे आंसू छोड़ गये,
उस बूढे बाप की बैसाखी, माटी के लिये जो तोड़ गये,
ना सोचा राखी की ये कलाई, बहिना कहां से लायेगी,
सजनी का भी ना सोचा ,  किसे  विजय का तिलक लगायेगी,
आजादी के लिये छोड़कर , जो अपनो की प्रीत गये,
सौ बार नमन है कम बेशक, उनको जो आखिर जीत गये!

हे वीर तुम्हे ये पुष्प समर्पित ,” रवि” का तुम्हे सलाम मिले,
नायक हो बस तुम ही सच्चे , तुमको ये हमारा पयाम मिले,
वो तुम हो जो भारत मां से, देकर के प्रीत की रीत गये,
सौ बार नमन है कम बेशक, उनको जो आखिर जीत गये!